शिमला, हिमाचल प्रदेश। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने बुधवार को स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ योजना हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है। उन्होंने बताया कि इस योजना को लागू करने पर राज्य सरकार को वित्तीय भार उठाना पड़ेगा, जो उचित नहीं है।
सीएम सुक्खू ने बताया कि पिछले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत केंद्र सरकार 100 प्रतिशत राशि प्रदान करती थी, जबकि नई योजना में राज्य सरकार को खर्च का 10 प्रतिशत हिस्सा देना पड़ता है। इस वित्तीय जिम्मेदारी के चलते राज्य की आर्थिक सीमाएं प्रभावित हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि ग्रामीण इलाकों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके। विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है तथा जल्द ही और भर्तियां की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पंचायत घर निर्माण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार 30 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त ऊना जिले में जिला पंचायत संसाधन केंद्र के निर्माण के लिए अतिरिक्त फंड देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
सुक्खू ने ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की आजीविका को मजबूती देने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 310 स्वयं सहायता समूहों को 65.56 लाख रुपए की क्रेडिट सहायता दी जा चुकी है।
स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए शिमला में ‘हिमाचल हाट’ का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा पंडोह और कुल्लू में भी शोरूम बनाये जा रहे हैं, जबकि धर्मशाला में एक शोरूम पहले से संचालित है।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए फूड वैन भी वितरित की गई हैं और भविष्य में ऐसी और गाड़ियां दी जाएंगी। विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाएं ताकि सही लाभार्थियों तक समय पर लाभ पहुंच सके।
अंत में उन्होंने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव को आदेश दिए कि वे विभाग की प्रमुख योजनाओं को प्रभावी ऑनलाइन निगरानी के लिए ‘मुख्यमंत्री डैशबोर्ड’ से जोड़ें, जिससे समस्त गतिविधियों की पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।
