बीजिंग, चीन – चीन और रूस की नौसेनाएँ 6 जुलाई से 13 जुलाई तक येलो सी में संयुक्त नौसेना अभ्यास करेंगी। यह क्षेत्र चीन और कोरियाई प्रायद्वीप के बीच स्थित है। रूसी प्रशांत बेड़े ने एक आधिकारिक बयान में इस अभ्यास की पुष्टि की है।
रूसी प्रशांत बेड़े की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह नौसेना अभ्यास दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और सामरिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने, आपसी तालमेल सुधारने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अभ्यास चीन और रूस के सामरिक साझेदारी को प्रदर्शित करते हैं, साथ ही यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकते हैं। येलो सी में यह अभ्यास विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समुद्री मार्ग दोनों देशों के आर्थिक और सुरक्षा हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इस अभ्यास में दोनों देशों की नौसैनिक शक्तियाँ विभिन्न समुद्री युद्धक रणनीतियों और तकनीकों का प्रदर्शन करेंगी। इसमें समुद्री रक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया, और समुद्री डाटा साझा करने जैसे दमदार तत्व शामिल होंगे।
चीन और रूस के बीच यह सहयोग बढ़ते वैश्विक तनाव और क्षेत्रीय चुनौतियों के मद्देनजर अहम माना जा रहा है। इससे पूर्व भी दोनों देशों ने कई बार संयुक्त सैन्य और नौसैनिक अभ्यास आयोजित किए हैं, जो उनके बीच सामरिक जुड़ाव को दर्शाते हैं।
समाचार एजेंसियों के अनुसार, यह अभ्यास क्षेत्रीय शांति और समुद्री कानूनों के पालन के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है। दोनों देश यह संकेत देना चाहते हैं कि वे समुद्री सुरक्षा के लिए समन्वित रूप से काम करेंगे और किसी भी बाहरी खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस अभ्यास को एक रणनीतिक संकेत के रूप में देखा है, जो चीन और रूस के बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य गठजोड़ को दर्शाता है। यह अभ्यास न केवल सैन्य प्रशिक्षण का हिस्सा है, बल्कि यह दोनों देशों की विदेश नीति का भी एक अहम हिस्सा बन गया है।
अतः यह संयुक्त नौसेना अभ्यास आने वाले दिनों में क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और चीन-रूस संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में मददगार साबित होगा।
