चंडीगढ़, पंजाब। शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब सरकार की बिजली संकट और किसानों तथा धान की खेती पर इसके प्रभाव को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर हर वर्ग को धोखा देने तथा सरकारी वादों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
मजीठिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार अनेक मोर्चों पर नाकाम साबित हुई है और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों, युवाओं, कर्मचारियों और उद्योग जगत को ठगा है। “पंजाब आज कर्ज में डूबा है और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। हमारे राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। खेती के बिना पंजाब नहीं चल सकता। लेकिन अफसोस है कि मुख्यमंत्री हर मामले में झूठ बोल रहे हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि मान सरकार ने वादा किया था कि राज्य में 24 घंटे बिजली मिलेगी, लेकिन आज स्थिति इस कदर बिगड़ी है कि बिजली की भारी कटौती होने लगी है और लोग लगातार बिजली की कमी से जूझ रहे हैं। इसके कारण किसान अपनी फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि यूरिया की कमी के कारण भी खेती प्रभावित हो रही है। मजीठिया ने कहा, “मुख्यमंत्री जनता की समस्याओं को समझने की बजाय नाकाफी कार्य कर रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के नेता नुक्कड़ नाटक में लगे हुए हैं।”
बिक्रम सिंह मजीठिया ने अपने अनुभव को उकेरते हुए कहा कि पूर्व की सरकार में बिजली की आपूर्ति 24 घंटे लगातार होती थी और लोग जनरेटर तक बंद कर चुके थे। लेकिन मान की सरकार में बिजली की कमी के कारण किसान जनरेटर चलाने पर मजबूर हो गए हैं। यह स्थिति खेती और कृषि उपज के लिए गंभीर खतरा है।”
उन्होंने मुख्यमंत्री के एक अन्य दावे पर भी कटाक्ष किया जिसमें मान ने दावा किया है कि 24 घंटे पानी की उपलब्धता है। मजीठिया ने कहा, “लोग विरोध कर रहे हैं क्योंकि पानी बिलकुल नहीं मिल रहा। मान सरकार ने केवल वीडियो बनाकर असली समस्याओं को छुपाने की कोशिश की है। पिछले साढ़े चार वर्षों में सरकार ने एक मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए एक कमरा भी नहीं बनाया, जिससे स्पष्ट होता है कि विकास कार्य केवल दिखावा हैं।”
शिरोमणि अकाली दल ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए पंजाब सरकार से तुरंत बिजली और पानी की समस्या को दूर करने और किसानों की फसलों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य की समृद्धि और आर्थिक स्थिरता कृषि पर निर्भर है, इसलिए सबसे पहले किसानों की समस्याओं का समाधान होना आवश्यक है।
