चंडीगढ़, हरियाणा। हरियाणा की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जॉर्जिया से गैंगस्टर वेंकट गर्ग का प्रत्यर्पण कराना अपने आप में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह भारत के लिए जॉर्जिया से पहला प्रत्यर्पण भी है और इस वर्ष एसटीएफ द्वारा किया गया दसवां डिपोर्टेशन है।
एसटीएफ ने बताया कि यह प्रत्यर्पण भारत और जॉर्जिया सरकारों के सहयोग से संभव हो पाया है। वेंकट गर्ग अंबाला जिले के नारायणगढ़ कस्बे का रहने वाला है और वह अपने गैंग का एक प्रमुख नेता था। इसके गैंग में कुल 53 सदस्य थे। यह गैंग अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, पंचकूला और चंडीगढ़ में संगठित अपराधों में संलग्न था।
एसटीएफ के अनुसार, इस गैंग ने कई संगठित अपराधों को अंजाम दिया है, जिसमें हत्या, टारगेटेड किलिंग, रंगदारी माँगना, हथियारों का गैरकानूनी इस्तेमाल और हत्या की कोशिश के मामले शामिल हैं। वेंकट गर्ग हरियाणा और चंडीगढ़ में एक घोषित अपराधी है, जिस पर कुल 34 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
वह भारत से भागने से पहले ही 23 आपराधिक मामलों में आरोपित था। विदेश भागने के बाद भी उसने अपने गैंग नियंत्रण को बनाए रखा और इसके कारण 11 और आपराधिक मामले दर्ज हुए। इनमें हत्या, रंगदारी, संगठित अपराध और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के मामले शामिल हैं।
गैंग से जुड़ी प्रमुख घटनाओं में नारायणगढ़ में बहुजन समाज पार्टी के नेता हरबिलास सिंह रज्जूमाजरा की हत्या और अंबाला व यमुनानगर जिलों में रंगदारी के लिए हुई फायरिंग की घटनाएं शामिल हैं।
एसटीएफ की जांच से पता चला कि वेंकट गर्ग 10 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यूएई भाग गया था। बाद में 26 जनवरी 2025 को वह जॉर्जिया पहुंचा। जांच में यह भी सामने आया कि उसने गुरुग्राम के सेक्टर-67 में पिरामिड अर्बन होम्स के एक अपार्टमेंट का गलत पता देकर धोखाधड़ी से पासपोर्ट हासिल किया था।
वेंकट गर्ग को भारत वापस लाने के लिए एसटीएफ ने कई कानूनी और अंतरराष्ट्रीय कदम उठाए। इनमें लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करना, इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करना, आरोपी को घोषित अपराधी करार देना और छह ओपन-डेटेड अरेस्ट वारंट लेना शामिल था।
इसके बाद अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन चैनलों से जानकारी मिली कि वह जॉर्जिया में है, जिसके बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की गई। यह प्रत्यर्पण भारत के विदेश मंत्रालय, नेशनल सेंट्रल ब्यूरो, जॉर्जिया और कजाकिस्तान में भारतीय दूतावासों के संयुक्त प्रयासों से संभव हो सका।
एसटीएफ अधिकारी इस सफलता को राज्य पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं, जो गैर-भारतीय भूमि पर बैठे भगोड़ों को वापस लाने की दिशा में एक बड़ी पहल है। इससे साफ संकेत मिलता है कि अपराधियों को कहीं भी छिपने की छूट नहीं दी जाएगी।
