नई दिल्ली, भारत
राष्ट्रीय सुरक्षा और साहस के प्रति समर्पण की एक और मिसाल के तौर पर हाल ही में कई वीर जवानों को उच्च सम्मानित किया गया। नेवी की लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. और लेफ्टिनेंट कमांडर रुपा ए., जो नविका सागर परिक्रमा II की सफल समाप्ति के बाद शौर्य चक्र से सम्मानित हुए हैं, ने देश के लिए गौरव का क्षण प्रस्तुत किया है।
दोनों अधिकारीयों ने न केवल समुंदर की विशाल लहरों को पार किया, बल्कि अपनी निर्भीकता और समर्पण से देश का नाम रोशन किया। उनकी यह उपलब्धि नौसेना के लिए एक प्रेरणा स्रोत है और युवा पीढ़ी के लिए भी आदर्श प्रस्तुत करती है।
इसी कड़ी में, राष्ट्रीय राइफल्स के महार रेजिमेंट के सेपॉय जनजल प्रवीण प्रभाकर और सिक्किम स्काउट्स के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को उनकी मृत्यु के बाद कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके अदम्य साहस और बलिदान को मान्यता देने के लिए प्रदान किया गया है।
सेपॉय जनजल प्रवीण प्रभाकर ने अपने कर्तव्य के दौरान जो साहस और पराक्रम दिखाया, वह सभी के लिए प्रेरणादायक है। इसी प्रकार, लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर सुरक्षा बलों की शौर्य गाथा को जीवित रखा।
रक्षा मंत्रालय ने इन बहादुर जवानों के परिवारों को सम्मानित किया और उनके पराक्रम को देश के सभी नागरिकों के सामने प्रस्तुत किया। यह सम्मान न केवल इन वीरों के परिवारों के लिए एक गौरव की बात है, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए भी प्रोत्साहन का स्रोत है।
इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि शौर्य चक्र और कीर्ति चक्र जैसे राष्ट्रीय सम्मान हमारे जवानों की वीरता, समर्पण और देशभक्ति का प्रतीक हैं। देश के जवान हर क्षेत्र में साहसिक कार्य कर रहे हैं और इनके इस साहस के लिए राष्ट्र सदैव ऋणी रहेगा।
इस प्रकार के सम्मान न केवल जवानों के मनोबल को बढ़ाते हैं, बल्कि पूरे देश में एकजुटता और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करते हैं। आने वाले समय में भी देश की सेना ऐसे ही वीरों को जन्म देती रहेगी जो अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित होकर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
