चेन्नई, तमिलनाडु।
राज्य के सचिवालय में लोगों के आने-जाने पर लगे सख्त प्रतिबंधों को लेकर सीपीएम के राष्ट्रीय सचिव पी. शणमुगम ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि पहले से ही कई पाबंदियां लागू हैं, लेकिन नई व्यवस्थाओं से आम जनता की सरकार तक पहुंच और भी मुश्किल हो जाएगी। सोशल मीडिया पर जारी अपने एक पोस्ट में शणमुगम ने यह बात कही।
उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से लगाए गए नए नियम आगंतुकों की संख्या को सीमित कर देंगे, जिससे लोगों का समस्या समाधान के लिए सीधे सचिवालय पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। “यह कदम आम नागरिकों के अधिकारों और उनकी आवाज को दबाने जैसा है,” उन्होंने कहा।
शणमुगम ने जनता से अपील की कि वे इस तरह की पाबंदियों को स्वीकार न करें और सरकारी मशीनरी के प्रति उनकी पहुंच को सुनिश्चित करें। उनका यह भी कहना था कि प्रशासन को चाहिए कि वे लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए अधिक पारदर्शी और सुगम रास्ते अपनाएं बजाय कि उन्हें और अधिक जटिल बनाने के।
इस मुद्दे पर कई समाजसेवी और विपक्षी दलों ने भी चिंता जताई है। उनका मानना है कि सरकार की इस नीति से केवल आम आदमी की परेशानी ही बढ़ेगी। सचिवालय में आने वाले नागरिक अक्सर अपनी समस्याओं के लिए मदद लेने आते हैं, लेकिन बढ़ती पाबंदियों के कारण उनकी आवाज दबती जा रही है।
हालांकि सरकार ने अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ये नियम सुरक्षा कारणों से लागू किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सचिवालय को पूरी तरह से जनता के लिए खुला रखना चाहिए और पाबंदियों को संतुलित तरीके से लागू किया जाना चाहिए, ताकि सुरक्षा और आम जनता की सुविधा दोनों के बीच सामंजस्य बना रहे।
इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में और भी चर्चा और विरोध देखने को मिल सकता है, क्योंकि जनता और विपक्ष इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।
