चेन्नई, तमिलनाडु
4 जून को संगीत जगत का एक अनमोल रत्न एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम का 80वां जन्मदिवस मनाया गया। बिना किसी पारंपरिक संगीत प्रशिक्षण के भी, एसपीबी ने अपनी अनूठी आवाज और अद्भुत गायकी से एक विशाल संगीत खज़ाना छोड़ा, जो भारतीय संगीत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है।
एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम ने अपने करियर की शुरुआत करीब चार दशकों पहले की थी और तब से लेकर अब तक उन्होंने लगभग 40,000 से भी ज्यादा गाने गाए हैं। उनकी आवाज़ में वह जादू था जो हर गीत को जीवंत कर देता था। चाहे वह भावुक गाना हो, जीवंत लोक गीत हो या फिर भक्ति संगीत, एसपीबी ने हर अंदाज में खुद को उतारा। उनकी सरलता और सहजता हर गीत में सुनाई देती थी, जो सुनने वालों के दिल को छू जाती थी।
गौरतलब है कि एसपीबी ने कभी भी औपचारिक संगीत शिक्षा नहीं ली, फिर भी उनका संगीत ज्ञान और उनकी कला काबिले तारीफ थी। उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, हिंदी और कई अन्य भारतीय भाषाओं में अपनी गायकी से सभी को मंत्रमुग्ध किया। उनकी आवाज़ की खासियत यह थी कि वे पूरे गीत को अपनी पहचान दे देते थे। मुस्कुराहट हो या आंसू, हर भावना उनके गाने में साफ झलकती थी।
उनके संगीत सफर की एक खास बात यह भी है कि उन्होंने अपने समय के कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया, जैसे एम.एस. विश्वेश्वरन, इलैयाराजा, ए.आर. रहमान और कई अन्य। उनकी सह-कार्यशैली से संगीत की नई परिभाषाएं गढ़ीं गईं।
एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम केवल एक गायक नहीं, बल्कि संगीत के प्रति समर्पित एक साधक थे। उनकी वर्क Ethic और समर्पण ने उन्हें लोकप्रियता के साथ-साथ आलोचनात्मक प्रशंसा भी दिलाई। उनकी मौत से संगीत प्रेमियों में एक खालीपन उत्पन्न हो गया है, लेकिन उनकी धुनें आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
80वें जन्मदिन पर, उन्हें याद करते हुए संगीत प्रेमी और उद्योग जगत उनके योगदान को सलाम कर रहे हैं। उनकी आवाज़ न केवल एक गीत की आवाज़ थी, बल्कि वो हर भावना की आवाज़ थी जिसे वे व्यक्त करना चाहते थे। इस प्रकार एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम भारतीय संगीत के इतिहास के सबसे बड़े और प्यारे स्वर बने रहेंगे।
