2% से कम कॉलेज ही कार्य-सम्बन्धित डिग्रियां प्रदान करते हैं: टीमलीज सर्वे

नई दिल्ली, भारत – हाल ही में जारी किए गए टीमलीज सर्वेक्षण के अनुसार, देश के कॉलेजों में कार्य-सम्बन्धित डिग्रियों की उपलब्धता बेहद सीमित है। सर्वे में यह पाया गया कि केवल 2% से भी कम कॉलेज ही छात्रों को ऐसे पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं जो सीधे रोजगार से जुड़े होते हैं।

टीमलीज ने बताया कि कार्य-सम्बन्धित डिग्रियां छात्रों को न केवल शैक्षणिक ज्ञान देती हैं बल्कि उन्हें व्यावसायिक कौशलों में भी प्रवीण बनाती हैं जो उन्हें नौकरी बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाती हैं। इसके बावजूद अधिकांश शैक्षणिक संस्थान अभी भी पारंपरिक पाठ्यक्रमों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इस सर्वे में 500 से अधिक उच्चशिक्षा संस्थानों का विश्लेषण किया गया, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि कार्य-सम्बन्धित डिग्रियों की पेशकश करने वाले कॉलेजों की संख्या न्यूनतम है। विशेषज्ञों ने इस स्थिति को बदलने के लिए शिक्षा नीति में सुधार और उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताई है।

टीमलीज के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि युवाओं की रोजगार योग्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए शिक्षा प्रणाली में व्यावसायिक और कार्य-आधारित पाठ्यक्रमों को शामिल करना जरूरी है। इससे न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में भी तेजी आएगी।

शैक्षणिक जगत के विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि कार्य-सम्बन्धित डिग्रियां छात्रों को रोजगार के लिए बेहतर तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेजों को आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम विकसित करना चाहिए जिससे छात्र व्यावहारिक ज्ञान और कौशल दोनों प्राप्त कर सकें।

सरकार की ओर से भी इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें नई नीतियों के माध्यम से कार्य-सम्बन्धित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, इसे व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए शिक्षण संस्थानों की भागीदारी और जागरूकता जरूरी है।

अंततः, यह सर्वे संकेत देता है कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है ताकि युवा कामकाजी दुनिया में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें।

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