नई दिल्ली, दिल्ली
देश में रोजगार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच, टीमलीज़ एडटेक सर्वे ने 2025 तक आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा साइंस के क्षेत्र में नौकरियों की मांग में भारी वृद्धि होने की भविष्यवाणी की है। यह सर्वे इस बात की पुष्टि करता है कि तकनीकी कौशल वाले पेशेवरों की भूमिका न केवल बढ़ेगी बल्कि वे नौकरी बाजार में महत्वपूर्ण निर्णायक बनेंगे।
टीमलीज़ एडटेक के वरिष्ठ शोधकर्ताओं के अनुसार, डिजिटल क्रांति के चलते प्रतियोगिता बढ़ती जा रही है और कंपनियां उन कर्मचारियों को प्राथमिकता देंगी जो एआई, मशीन लर्निंग, और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में सक्षम हों। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी ने ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा दिया है, जिससे तकनीकी रोजगारों की संभावना और भी मजबूत हुई है।
सर्वे में यह भी पाया गया है कि भारत के विभिन्न हिस्सों में तकनीकी कौशल के प्रति युवाओं की रुचि में वृद्धि हो रही है। साइबर सुरक्षा, क्लाउड कम्प्यूटिंग, और ब्लॉकचेन जैसी नई तकनीकों के क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न शैक्षणिक संस्थान और प्रशिक्षण केंद्र सक्रिय हैं। इसके प्रभाव से आने वाले वर्षों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नौकरी चाहने वालों को अब केवल पारंपरिक कौशलों पर निर्भर रहने के बजाय तकनीकी अद्यतनों के साथ खुद को अपडेट रखना होगा। इसके लिए नई शिक्षा परियोजनाओं और व्यावसायिक कौशल विकास प्रोग्रामों का सहारा लेना आवश्यक होगा।
डिजिटल युग में रोजगार के स्वरूप बदलते जा रहे हैं, जो युवाओं के लिए नई चुनौती एवं अवसर दोनों प्रस्तुत करते हैं। आने वाले वर्षों में यदि भारत की युवा पीढ़ी इन नए तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त करती है, तो वह न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर पाएगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी।
इस प्रकार, 2025 तक एआई और डेटा साइंस आधारित नौकरियां न सिर्फ बढ़ेंगी, बल्कि ये क्षेत्र नौकरी बाजार के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरेंगे। सरकार, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर इस बदलाव के अनुरूप नीतियां और प्रशिक्षण योजनाएं विकसित करनी होंगी, ताकि रोजगार के क्षेत्र में युवाओं का भविष्य उज्जवल हो सके।
