चंडीगढ़/जयपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस के खिलाफ दिए गए बयान ने सियासत में गर्माहट पैदा कर दी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विभिन्न राज्य सरकारों के मंत्री इस बयान की निंदा कर रहे हैं और राहुल गांधी से माफी की मांग कर रहे हैं। इस विवाद ने विपक्ष और सरकार के बीच तनातनी को और गहरा कर दिया है।
हरियाणा सरकार में राज्यमंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह देश के सेवा में लगे हुए हैं। वे लगातार मेहनत कर देश को विकास के पथ पर ले जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जब कांग्रेस शासन में थी, तब देश की अर्थव्यवस्था 14वें स्थान पर थी, जबकि वर्तमान में यह तीसरे नंबर पर पहुंच चुकी है।
अनिल विज ने कहा कि भाजपा की सरकार के नेतृत्व में देश के प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति हुई है और जनता ने भी अपने फैसले से इसे मान्यता दी है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को जनता द्वारा लगातार चुनावों में पराजय मिलने के बाद अपनी हार स्वीकार करनी चाहिए। भाजपा लगभग 22 राज्यों में सरकार चला रही है, जो कि उसकी लोकप्रियता का परिचायक है।
प्रधानमंत्री के विदेश दौरे पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए अनिल विज ने बताया कि मोदी जी विश्व के किसी भी कोने में रहें, वे देश की समस्याओं से जुड़े रहते हैं। उनका विदेश जाना देश की कूटनीति मजबूत करना और विकास के नए अवसर तलाशना होता है। उन्होंने राहुल गांधी की इसी बात पर असहमति जतायी क्योंकि खुद राहुल गांधी ज्यादा विदेशी दौरों पर जाते हैं।
वहीं राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के रवैये को हताशा की निशानी बताते हुए कहा कि भाजपा ने देश की समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के पास अब कोई ऐसा मुद्दा नहीं बचा जिससे वे जनता का ध्यान खींच सकें और इसलिए वे इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से अनुशासन बनाए रखने और संवेदनशील शब्दावली के उपयोग की अपील की।
मदन राठौड़ ने यह भी ध्यान दिलाया कि पहले की नेता जैसे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कभी इस प्रकार की भाषा का उपयोग नहीं किया, जो कि वर्तमान दौर की राजनीति का एक नकारात्मक पक्ष है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधाभास होना स्वाभाविक है, परन्तु मर्यादा और सम्मान से भरी राजनीति होनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बहस शुरू कर दी है कि नेताओं को अपने शब्दों और बयानों को सोच-समझकर ही रखना चाहिए, जिससे समाज में शांति और सद्भाव बना रहे। स्थानीय जनता भी इस विवाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है और राजनीतिक पार्टियों से अपेक्षा कर रही है कि वे रचनात्मक संवाद के जरिए देशहित में काम करें।
