चेन्नई, तमिलनाडु – पचास साल बीत गए, लेकिन अन्नाकिली की मधुर धुनें आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती हैं। इस फिल्म ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि महान संगीतकार इलैयाराजा के असाधारण संगीत यात्रा की शुरुआत भी की। इलैयाराजा के करियर का यह पहला महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जिसने उन्हें भारतीय संगीत जगत में एक अमिट स्थान दिलाया।
अन्नाकिली की सफलता का श्रेय मात्र कहानी या अभिनय को नहीं दिया जा सकता, बल्कि इसमें इलैयाराजा के संगीत ने एक नई मिसाल कायम की। फिल्म के संगीत ने श्रोताओं के मन पर ऐसा प्रभाव डाला कि आज भी उसके गीतों को याद किया जाता है। गाने जैसे ‘अन्नाकिली उनै थेदुथे’ अपने उच्च स्वर और भावपूर्ण धुन के लिए खासे प्रसिद्ध हैं।
गंगई अमरन, जो इलैयाराजा के छोटे भाई हैं और इस फिल्म की रिदम गिटार बजाने के साथ-साथ संगीत निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाई, ने बी. कोलप्पन को बताया, “उस समय के संगीत सत्र हमारे लिए बेहद खास थे। ‘अन्नाकिली उनै थेदुथे’ के उच्च स्वर संगीत की उस उन्नति को दर्शाते थे, जो इलैयाराजा को भविष्य में हासिल करनी थी।”
इलैयाराजा की यह पहली बड़ी सफलता उनके जीवन का एक नया अध्याय साबित हुई। उन्होंने इस फिल्म के बाद लगातार कई हिट फिल्में दीं, जिसने उन्हें दक्षिण भारतीय संगीत का सम्राट बना दिया। अन्नाकिली के गीतों में लोकसंगीत की प्रभावशाली झलक के साथ आधुनिक संगीत का मेल देखने को मिलता है, जो सभी वर्गों के लोगों को भा गया।
पचास वर्षों के बाद भी अन्नाकिली का संगीत आज के समय में भी प्रासंगिक है और नए संगीतकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। यह फिल्म न केवल इलैयाराजा के लिए, बल्कि पूरे भारतीय संगीत उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई है।
