नई दिल्ली, भारत – पेंटागन द्वारा घोषित किया गया कि ईरान के साथ संभावित युद्ध की अनुमानित लागत लगभग 25 अरब डॉलर होगी, लेकिन कई विशेषज्ञ इस आंकड़े को कम आंकते हैं। उनका मानना है कि वास्तविक खर्च इससे कहीं अधिक हो सकता है, खासकर जब दैनिक खर्चे और युद्ध में विशेषज्ञ उपकरणों के नुकसान को ध्यान में रखा जाए।
विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध की वास्तविक आर्थिक हानि कई गुना ज्यादा हो सकती है। दैनिक खर्चों का अनुमान करीब 2 अरब डॉलर तक लगाया जा रहा है, जो युद्ध की पूरी अवधि को देखते हुए भारी आर्थिक बोझ पैदा कर सकता है। इसके अतिरिक्त, विमान, मिसाइल प्रणाली और नौसेना संचालन में होने वाले बड़े नुकसान भी कुल मिलाकर लागत में काफी इजाफा करेंगे।
एक वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक ने कहा, “सिर्फ हथियार और सैनिकों की तैनाती पर ही नहीं, बल्कि युद्ध के दौरान होने वाले छुपे खर्च और नुकसान भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। जो आंकड़े अभी सामने आए हैं, वे केवल प्रारंभिक हैं, वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर हो सकती है।”
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है, और संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारियाँ भी हो रही हैं। युद्ध की आर्थिक लागत का अनुमान लगाना इस संघर्ष के पैमाने और गंभीरता को समझने में मदद करता है। कई अर्थशास्त्री भी इस बात पर सहमत हैं कि इसकी लागत न केवल सैन्य खर्च तक ही सीमित रहेगी, बल्कि वैश्विक आर्थिक प्रभाव भी देखने को मिलेंगे।
इस स्थिति में पेंटागन को भी अपनी रिपोर्ट में संभवतः पूरी तस्वीर पेश करने की आवश्यकता है ताकि नीति निर्माता समझदारी से फैसले ले सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध हुआ तो इसका सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव भी बहुत गहरा होगा। इसलिए युद्ध की वास्तविक लागत को लेकर अधिक पारदर्शिता और गहन विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है।
इस प्रकार, पेंटागन द्वारा प्रस्तुत $25 बिलियन की प्रारंभिक लागत अनुमानित राशि है, जबकि वास्तविक खर्च इससे कहीं अधिक हो सकता है। विशेषज्ञों की चेतावनी से यह स्पष्ट होता है कि कोई भी सैन्य संघर्ष लंबे समय तक न केवल फौजी बल्कि आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से भी गंभीर परिणाम ला सकता है।
