चंडीगढ़, पंजाब। आम आदमी पार्टी में बड़े स्तर पर हुई टूट के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। मुख्यमंत्री मान इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं क्योंकि उनकी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री अपने इस कदम के जरिए राज्यसभा के रिकॉल प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रपति के समक्ष अपनी बात रखना चाहते हैं।
जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब के पार्टी विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं, जिसमें वे भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्यों के रिकॉल करने पर अपनी राय देंगे। इस कदम से मुख्यमंत्री अपनी पार्टी की सत्ता पर आए इस संकट का स्पष्ट जवाब देना चाहते हैं।
आम आदमी पार्टी में फूट सार्वजनिक तौर पर तब सामने आई जब राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने की घोषणा की। इसके साथ ही, उन्होंने चार अन्य सांसदों के भी नाम लिए जो पार्टी छोड़ चुके हैं। इसके बाद ये सांसद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से सदस्यता ग्रहण करने के लिए भाजपा कार्यालय पहुंचे।
इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन सांसदों को कड़ी निंदा की है और कहा कि ये लोग पंजाब का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पार्टी किसी एक व्यक्ति से बड़ी है और जो सांसद पार्टी छोड़कर भाजपा में गए हैं, वे हमारे पंजाब के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वे पंजाब की राजनीति में बाधाएं पैदा कर रही है और अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह भी कहा कि पंजाबी दिल से सभी से प्यार करते हैं, लेकिन ऐसे लोगों को कभी नहीं भूलते जो विश्वासघात करते हैं। उनका कहना है कि भाजपा में शामिल हुए अधिकांश सांसद पंजाब से नहीं हैं और उन्हें वोट की चिंता नहीं थी, बल्कि वे केवल अपनी राजनीतिक सुरक्षा के लिए यह कदम उठा रहे हैं। अब वे भाजपा में भी अपनी जगह नहीं बना पाएंगे क्योंकि उनकी नीति और पंजाब के हितों में जमीन-आसमान का अंतर है।
यह स्थिति आम आदमी पार्टी और पंजाब की राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है। इस दौरान भगवंत मान की रणनीति और उनकी अगुवाई वाली पार्टी की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण साबित होगी। आम आदमी पार्टी की स्थिति, पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए सांसदों के मामलों तथा राज्यसभा रिकॉल की प्रक्रिया पर राजनीतिक हलचल जारी रहने की संभावना है।
प्रदेश की जनता एवं राजनीतिक विश्लेषक अब इस मामले पर आगामी दिनों में होने वाले घटनाक्रम पर नजरें गड़ाए हुए हैं कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी टीम इस राजनीतिक संकट को किस प्रकार संभालती है।
