अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स को H-1B वीजा एक्सटेंशन के लिए बड़ा बदलाव झेलना पड़ सकता है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और USCIS ने ‘डेफरेंस टू प्रायर अप्रूवल्स’ पॉलिसी को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर 13 नवंबर, 2026 तक प्रतिक्रिया मांगी जा रही है। इस बदलाव से H-1B वर्कर्स के लिए ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया प्रभावित होगी।
डेफरेंस पॉलिसी में प्रस्तावित बदलाव
फिलहाल, जब USCIS किसी ऐसे H-1B एक्सटेंशन आवेदन को देखता है जिसमें कंपनी, कर्मचारी और स्थिति में बदलाव न हो, तो पहले के फैसले को प्राथमिकता दी जाती है। इस ‘डेफरेंस पॉलिसी’ के तहत अधिकारियों को यह मानना होता है कि पिछली मंजूरी सही थी जब तक कोई नई नकारात्मक जानकारी सामने न आए। नई पॉलिसी लागू होने पर हर एक्सटेंशन एप्लिकेशन को पूरी तरह से मूल्यांकन किया जाएगा।
इसका मतलब है कि हर रिन्यूअल के दौरान नौकरी की योग्यता, वेतन स्तर और कर्मचारी तथा कंपनी के संबंधों की फिर से जांच होगी। इससे H-1B वर्कर्स को बार-बार पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जो पहले आसान था।
सरकार के तर्क और संभावित असर
ट्रंप सरकार का कहना है कि मौजूदा नियम इमिग्रेशन अधिकारियों को पूरी तरह से जांच करने से रोकते हैं। DHS की मानें तो इससे पहले दी गई गलत मंजूरियां बनी रहती हैं और धोखाधड़ी के मामले सामने आते हैं। इस प्रस्ताव से अधिकारी हर केस की गहराई से जांच कर सकेंगे और तय करेंगे कि आवेदक अब भी उपयुक्त हैं या नहीं।
2025 वित्तीय वर्ष में H-1B वीजा धारकों में लगभग 71% भारतीय हैं, इसलिए इस बदलाव का सबसे बड़ा असर भारतीय वर्कर्स पर पड़ेगा। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के अनुसार, करीब 10 लाख भारतीय ग्रीन कार्ड के लिए लंबी कतार में हैं। EB-2 कैटेगरी में उन्हें लगभग 179 साल और EB-3 में 38 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।
जो भारतीय कर्मचारी AC21 के तहत तीन साल एक्सटेंशन लेकर एक दशक से अधिक समय से काम कर रहे हैं, उन्हें अब उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि पिछली मंजूरी स्वचालित रूप से वैध रहेगी। हर बार उन्हें पूरी तरह जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा।
इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि बदलाव का सबसे बड़ा खतरा वीजा एप्लिकेशन की लंबी देरी है। ‘रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस’ (RFE) में वृद्धि से फैसले में 240 दिन से ज्यादा लग सकते हैं। इस कारण I-140 मंजूर होने के बावजूद कर्मचारी काम छोरने को मजबूर हो सकते हैं।
इसके अलावा, एंप्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्यूमेंट (EAD) के ऑटोमैटिक एक्सटेंशन बंद होने से H-4 वीजा पर निर्भर जीवनसाथियों को भी मुश्किलें हो सकती हैं। वे भी लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते वर्क ऑथराइजेशन खोने के खतरे से जूझ रहे हैं।
