नई दिल्ली। सीजेपी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई है, जिसके बाद उनके वकीलों और पार्टी के पदाधिकारियों ने अदालत की कार्यवाही पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि न्यायिक प्रक्रिया में कई अनियमितताएं हुई हैं।
न्यायिक हिरासत और वकीलों की आपत्तियां
अधिवक्ता अभिक चिमनी ने बताया कि जब वे अदालत पहुंचे, तब पांच दिन की हिरासत पूरी हो चुकी थी। पिछली सुनवाई में अदालत ने जमानतदारों के दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना था। इसके बाद नए जमानतदारों के कागजात लेकर वे वापस आए, लेकिन अदालत ने हिरासत अवधि बढ़ा दी।
वहीं, अधिवक्ता अभिष्त हेल ने कहा कि दोनों नेताओं को पहले ही तथ्यों के आधार पर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इस अवधि के बाद दोबारा सुनवाई हुई, लेकिन अब कुल छह दिन की हिरासत हो चुकी है।
कतार में सीजेपी पदाधिकारियों की आलोचना
सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने अदालत की कार्यवाही पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “अदालत में जो कुछ हो रहा है, वह मजाक जैसा है। कानून के पहलुओं पर चर्चा तक नहीं हुई।” उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि किस तरह किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलते हुए कार्रवाई की जा रही है, यह गंभीर चिंता का विषय है।
रत्ना सिंह ने अन्य अदालतों से भी इस मामले पर ध्यान देने की अपील की। सीजेपी प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने भी हिरासत बढ़ाने की कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए पूछा कि आखिर दोनों नेताओं ने कौन सा अपराध किया है।
पुष्प शर्मा, जो दोनों की ओर से वकील हैं, ने भी अदालत की कार्यवाही की आलोचना करते हुए कहा कि यह राजनीतिक रूप से सही दिखने की कोशिश है, न कि कानूनी तौर पर। उन्होंने कहा कि अंदर जो चल रहा है, वह कानून और न्याय के लिहाज से चौंकाने वाला और बेतुका है।
इस बीच, सीजेपी का आरोप है कि जांच और सुनवाई में विधिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा है। पार्टी की ओर से अनुरोध किया गया है कि न्यायिक प्रणाली की सच्चाई सामने लाई जाए।
इस मामले ने कानूनी और राजनीतिक जगत में भी चर्चा को जन्म दिया है, जहाँ अनेक विशेषज्ञ अदालत की कार्यवाही की समीक्षा कर रहे हैं। सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत के मामले में आने वाले दिनों में और सुनवाई होने की संभावना है।
