इटली में हाल ही में हुई हिंसक प्रदर्शन की वजह से प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी मुश्किल में आ गई हैं। शनिवार को देश भर में हुए विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 4,400 करोड़ रुपये की संपत्ति जला दी। विरोध का नेतृत्व ज्यादातर युवा जेन-अल्फा पीढ़ी के छात्रों ने किया, जो वर्तमान शिक्षा नीति के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
प्रदर्शन और गिरफ्तारी
ANSA न्यूज एजेंसी के अनुसार, रविवार को पुलिस ने 200 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया, जिनमें ज्यादातर 16 वर्ष के नाबालिग शामिल हैं। इस हिंसात्मक घटना ने पूरे देश का माहौल खराब कर दिया है। प्रधानमंत्री मेलोनी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया है कि जो लोग आगजनी कर रहे हैं, वे देश के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने इन युवा प्रदर्शनकारियों को दंगाई बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनकी यह प्रतिक्रिया बढ़ती अशांति को नियंत्रित करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
जेन-अल्फा का विरोध और कारण
इटली में जेन-अल्फा कहे जाने वाले छात्र समूह का कहना है कि सरकार हथियारों की खरीद पर अधिक ध्यान दे रही है, जबकि शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। इस समूह ने “नो वेपंस” का नारा लगाते हुए इस असंतोष को व्यक्त किया। इस विरोध प्रदर्शन का समय भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इटली में 2027 के आम चुनाव की तैयारी चल रही है।
2024 में इटली की GDP का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया गया, जो करीब 97 अरब डॉलर (9.21 लाख करोड़ रुपए) है। तुलना में, हथियार खरीद पर करीब 30 अरब डॉलर (2.8 लाख करोड़ रुपए) खर्च हुए हैं। रक्षा बजट कुल मिलाकर 50 अरब डॉलर (4.75 लाख करोड़ रुपए) का है। अमेरिका और नाटो के दबाव में यह सरकारी निर्णय लिया गया है।
प्रधानमंत्री मेलोनी ने इस पूरे प्रकरण के लिए वामपंथी नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि उन्होंने युवाओं को उकसाया है। उन्होंने साफ किया कि हिंसा करने वाले गुंडों को बख्शा नहीं जाएगा। यह बयान इस विवाद को राजनीतिक रूप देने का संकेत माना जा रहा है।
इटली के साथ ही फ्रांस में भी समान विरोध प्रदर्शन हुए हैं जहां रविवार को 1500 से अधिक दुकानों में आग लगाई गई। इससे यूरोप के राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर भी असर पड़ा है।
यह हिंसा इटली के शिक्षा बजट और सुरक्षा नीति पर सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर बढ़ती असंतोष की छवि पेश करती है। घटना के बाद प्रधानमंत्री की चुनौती बनी हुई है कि वह कैसे इस परिस्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से हल करें।
देश में जेन-अल्फा के युवा विरोध ने इटली की आंतरिक राजनीति को जटिल कर दिया है और आगामी चुनावों में इसका असर देखा जाना बाकी है। प्रधान मंत्री की प्रतिक्रिया और सरकार की नीतियां इस परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण बनेगी।
