अमेरिका में H-1B वीजा नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना बढ़ाने और सख्ती बढ़ाने के लिए एक नया बिल अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश किया गया है। इस बिल का उद्देश्य H-1B वीजा प्रोग्राम का दुरुपयोग रोकना और नियमों के उल्लंघन पर कठोर सजा लगाना है। इससे अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों सहित विदेशी वर्कर्स को चिंता हो गई है।
बिल के मुख्य प्रावधान
प्रस्तावित बिल के अनुसार, H-1B वीजा के गंभीर उल्लंघनों पर लगने वाला अधिकतम जुर्माना बढ़ाकर 2,50,000 डॉलर (करीब 2.40 करोड़ रुपये) किया जाएगा। वर्तमान में यह जुर्माना 35,000 डॉलर है। इसके अलावा नियम तोड़ने वालों को कम से कम तीन साल तक इमिग्रेशन प्रोग्राम में भाग लेने से रोक दिया जाता है, जिसे इस बिल के तहत कम से कम दस साल तक बढ़ाने की बात कही गई है।
बिल में एक और उल्लंघन श्रेणी के लिए जुर्माना 5,000 डॉलर से बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर करने की भी पेशकश की गई है। इस श्रेणी में शामिल लोगों को प्रोग्राम से दो साल तक बाहर रखा जाता था, जो पांच साल तक बढ़ाया जाएगा। कुल मिलाकर यह कानून H-1B नियमों के प्रभावी पालन को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
डॉक्यूमेंट फ्रॉड पर कड़ी सजा
इस बिल में इमिग्रेशन से जुड़ी धोखाधड़ी और दस्तावेजों में फर्जीवाड़े के लिए भी जुर्माना बढ़ाने का प्रावधान है। डॉक्यूमेंट फ्रॉड की कम गंभीर श्रेणी के लिए जुर्माना 2,000 डॉलर से बढ़ाकर 10,000 डॉलर तक किया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में इसे 50,000 डॉलर तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। ये संशोधन ‘इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट’ की धारा 274C में किए जाएंगे।
यह कानून टेक्सास की रिप्रेजेंटेटिव बेथ वैन डुइन ने पेश किया है, जिनके साथ रिप्रेजेंटेटिव गिल, सेशंस, सेल्फ, बैबिन और फैलन को-स्पॉन्सर के रूप में जुड़े हैं। अभी यह बिल कानून बनने से पहले हाउस और सीनेट की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
H-1B वीजा प्रोग्राम के तहत अमेरिका में विदेशी कुशल कर्मचारियों को रोजगार दिया जाता है, लेकिन इसके दुरुपयोग की शिकायतें लगातार आती रही हैं। ट्रंप प्रशासन ने इस प्रोग्राम में सुधार और कड़ाई की पहल की थी। नया बिल इसी प्रयास के तहत सख्त कानून लाने का कदम है।
इस कदम से H-1B वीजा धारकों और कंपनियों की जांच और नियंत्रण कड़ा हो जाएगा, जिससे नियम उल्लंघन में कमी आ सकती है। वहीं, इस प्रस्ताव से भारत समेत अन्य देशों के कामगारों को रोजगार की स्थिरता को लेकर असुरक्षा हो सकती है।
इमिग्रेशन विशेषज्ञ इसे विदेशी कामगारों के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बताते हुए कहते हैं कि इससे हायर यूएस टेक सेक्टर में काम करने वाले भारतीयों को भारी असर पड़ सकता है। विदेशी कर्मचारियों को अब अधिक सावधानी बरतनी होगी और कंपनियों को भी नियमों का पालन कड़ाई से करना होगा।
इस बिल के लागू होने पर H-1B वीजा नियमों का उल्लंघन करने वालों को भारी आर्थिक दंड के अलावा कई वर्षों तक अमेरिका में काम करने का मौका नहीं मिलेगा। इससे नियम पालन बढ़ाने और धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी, परन्तु विदेशी कामगारों के लिए यह चिंता का विषय भी बन सकता है। सरकार के इस प्रस्ताव के हाउस और सीनेट से मंजूरी मिलने और कानून बनने तक सभी की निगाहें टिकी होंगी।
