नई दिल्ली, दिल्ली
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किए जाने के बाद भाजपा ने इसे खारिज किया है। भाजपा का कहना है कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए नहीं गए हैं, बल्कि मसौदा मतदाता सूची में उन्हें अलग-अलग श्रेणियों के तहत चिह्नित किया गया है।
भाजपा ने बताया कि इन मतदाताओं को मृत, अनुपस्थित, स्थानांतरित या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया है। पार्टी के अनुसार, मसौदा सूची के स्तर पर किसी नाम को चिह्नित किया जाना अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के समान नहीं है।
भाजपा ने कहा कि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस संबंध में अंतिम कार्रवाई की जाएगी। पार्टी ने विपक्ष पर एसआईआर को लेकर लोगों के बीच भ्रम और डर फैलाने का आरोप लगाया।
भाजपा ने एसआईआर से जुड़े विभिन्न दावों और तथ्यों का विस्तृत विश्लेषण भी साझा किया। पार्टी ने कांग्रेस के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें फार्म-6 में बदलाव किए जाने की बात कही गई थी।
भाजपा के मुताबिक, फार्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मतदाताओं की सुविधा के लिए केवल एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया है। पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची की व्यवस्था अभी भी विकेंद्रीकृत है और राज्य चुनाव तंत्र के पास कानून के तहत आवश्यक अधिकार मौजूद हैं।
भाजपा ने अपने स्पष्टीकरण में नए मतदाताओं का आंकड़ा भी साझा किया। पार्टी के अनुसार, जून 2025 से अब तक 2.37 करोड़ नए युवा मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ा गया है।
एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा का कहना है कि 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा सही नहीं है और अंतिम सूची तैयार होने से पहले दावे एवं आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
