जयपुर, राजस्थान
राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य में संचालित करीब तीन हजार मदरसों के संचालन, नियंत्रण और शैक्षणिक पर्यवेक्षण को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की पीठ ने सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
यह मामला प्रतिपाल सिंह और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में मदरसों के प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की नियुक्ति और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर अदालत का ध्यान आकर्षित किया।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने राजस्थान मदरसा बोर्ड अधिनियम, 2020 का हवाला देते हुए कहा कि कानून में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।
याचिका में मदरसों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की व्यवस्था मजबूत करने और शिक्षा के स्तर में सुधार की मांग की गई है। इसके साथ ही प्रबंधन में पारदर्शिता लाने की आवश्यकता भी बताई गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह सुझाव भी दिया गया कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और केंद्रीय शिक्षा बोर्ड से जुड़े मदरसों की सूची तैयार की जाए। इसके अलावा मदरसों में शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप संचालित करने की मांग की गई है।
हाई कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से मदरसों के संचालन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। सरकार को अदालत में हलफनामा दाखिल कर संबंधित जानकारी देनी होगी।
अदालत के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार की रिपोर्ट पर सभी की नजर रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी, जिसमें सरकार की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर चर्चा हो सकती है।
