यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म कराने की कोशिश तेज, पुतिन और जेलेंस्की से अमेरिकी दूतों की अहम वार्ता


मॉस्को, रूस

रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने की अमेरिकी कोशिशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने पहले मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और इसके बाद यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचकर राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ बातचीत की। दोनों बैठकों को संबंधित पक्षों ने सकारात्मक बताया है, लेकिन शांति समझौते की मुख्य शर्तों पर गतिरोध अभी भी बना हुआ है।

मॉस्को में अमेरिकी दूतों और पुतिन के बीच करीब तीन घंटे तक बातचीत हुई। रूसी राष्ट्रपति के विदेशी मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने बैठक को सकारात्मक और लाभदायक बताया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वार्ता के बावजूद रूस के युद्ध संबंधी लक्ष्यों में कोई बदलाव नहीं आया है।

रूस डोनबास पर नियंत्रण और यूक्रेन के नाटो से दूर रहने की अपनी मांग पर कायम है। यही दोनों पक्षों के बीच शांति समझौते की राह में प्रमुख अड़चनों में शामिल है।

मॉस्को बैठक के बाद विटकॉफ और कुशनर रविवार को कीव पहुंचे। यहां उन्होंने जेलेंस्की और यूक्रेनी अधिकारियों के साथ बातचीत की। जेलेंस्की ने अमेरिकी दूतों के पहुंचने से पहले कहा था कि यूक्रेन शांति के साथ भविष्य के लिए सुरक्षा गारंटी भी चाहता है। यूक्रेन के लिए युद्ध समाप्त होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है।

एक वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की जेलेंस्की और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दो दौर की बैठक होनी थी। इसके बाद फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा का कार्यक्रम था। इससे संकेत मिलता है कि शांति प्रक्रिया में यूरोपीय देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

इस बीच मॉस्को और कीव में किसी बड़े हमले की जानकारी नहीं मिली है, हालांकि काला सागर में एक यूक्रेनी जहाज पर रूस की ओर से हमला किया गया है।

पिछले छह महीनों के दौरान यूक्रेन ने ड्रोन और मिसाइल हमलों से रूस को नुकसान पहुंचाया है। जवाब में रूस ने हाल के दो महीनों में कीव समेत कई यूक्रेनी शहरों पर हमले बढ़ाए हैं। रूस के जेट इंजन वाले ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों ने यूक्रेन में भारी नुकसान पहुंचाया है।

ऐसे में दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिकी मध्यस्थता से उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण, नाटो और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर सहमति के बिना स्थायी शांति समझौता अभी दूर दिखाई दे रहा है।

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