नई दिल्ली: बॉलीवुड के लोकप्रिय गानों की दुनिया में कुछ ऐसे शब्द भी हैं, जो सुनने में बेहद खूबसूरत लगते हैं, लेकिन उनका कोई तय शब्दकोशीय अर्थ नहीं होता। ऐसा ही एक शब्द है ‘मसकली’, जो साल 2009 में आई फिल्म दिल्ली-6 के सुपरहिट गाने की वजह से घर-घर में मशहूर हो गया। इस गाने को ए. आर. रहमान ने संगीत दिया था, जबकि इसे मोहित चौहान ने अपनी आवाज दी और बोल प्रसून जोशी ने लिखे थे।
लेकिन अब इस गाने से जुड़ा एक पुराना किस्सा फिर चर्चा में है। फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान ने हाल ही में खुलासा किया है कि ‘मसकली’ को ए. आर. रहमान ने मूल रूप से दिल्ली-6 के लिए नहीं, बल्कि शाहरुख खान की फिल्म ‘ओम शांति ओम’ के लिए तैयार किया था। फराह खान के मुताबिक, रहमान उस फिल्म के लिए उनकी पहली पसंद थे और उन्होंने फिल्म के लिए शुरुआती दौर में ‘मसकली’ गाना बनाया था।
‘ओम शांति ओम’ के लिए बना था ‘मसकली’
फराह खान ने यह दिलचस्प खुलासा संगीतकार विशाल ददलानी के साथ बातचीत के दौरान किया। उन्होंने बताया कि ओम शांति ओम के संगीत के लिए वह सबसे पहले ए. आर. रहमान के पास गई थीं। इसी दौरान रहमान ने फिल्म के लिए ‘मसकली’ तैयार किया था।
फराह ने बताया कि उस समय उन्हें यह भी तय नहीं था कि फिल्म में इस गाने को कहां इस्तेमाल किया जाएगा। उन्हें गाना और उसका नाम दोनों पसंद थे। बाद में जब ओम शांति ओम के संगीत की जिम्मेदारी विशाल-शेखर के पास गई, तो यह गाना उस फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाया।
इसके बाद यही गाना दिल्ली-6 का हिस्सा बना और रिलीज होते ही दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय हो गया। दिल्ली-6 साल 2009 में रिलीज हुई थी और इसमें अभिषेक बच्चन तथा सोनम कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म का संगीत ए. आर. रहमान ने तैयार किया था।
आखिर ‘मसकली’ का मतलब क्या है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ‘मसकली’ शब्द का अर्थ क्या है? अगर आप इसे किसी सामान्य हिंदी या अंग्रेजी शब्दकोश में खोजेंगे, तो इस गाने के संदर्भ वाला अर्थ आपको नहीं मिलेगा।
इसकी वजह खुद गीतकार प्रसून जोशी ने बताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि ‘मसकली’ कोई पारंपरिक हिंदी, उर्दू या अंग्रेजी शब्द नहीं है, बल्कि उन्होंने इसे खुद गढ़ा था। यानी इस शब्द का कोई निर्धारित शब्दकोशीय अर्थ नहीं है।
गाने की कहानी में ‘मसकली’ नाम एक कबूतर को दिया गया था। यही वजह है कि गाने के वीडियो और उसके दृश्यांकन में कबूतर को भी प्रमुखता से दिखाया गया। प्रसून जोशी ने बताया था कि इस नए शब्द को कहानी के संदर्भ से जोड़ने के लिए फिल्म में कबूतर का नाम ही ‘मसकली’ रखा गया।
शब्द नहीं, एक एहसास है ‘मसकली’
‘मसकली’ की खासियत यही है कि इसका कोई एक शाब्दिक अर्थ तय नहीं है। गीत में उड़ान, आजादी, बेफिक्री और खुले मन की भावनाओं को जिस तरह पेश किया गया, उसी वजह से यह शब्द लोगों के बीच एक खास एहसास से जुड़ गया।
प्रसून जोशी ने भी बाद में कहा था कि ‘मसकली’ को उन्होंने गीत की कल्पना और भावनाओं के जरिए अर्थ देने की कोशिश की थी। यानी यह किसी शब्द का सीधा अनुवाद नहीं, बल्कि गीत की पूरी कल्पना का हिस्सा है।
‘दिल्ली-6’ में भी अचानक आया था गाना
दिलचस्प बात यह है कि ‘मसकली’ दिल्ली-6 की कहानी का पहले से तय हिस्सा भी नहीं था। फिल्म के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा के मुताबिक, कहानी के अंतिम हिस्से की ओर बढ़ते समय उन्हें एक ऐसे गीत की जरूरत महसूस हुई, जो कथा को आगे जोड़ सके। इसी प्रक्रिया में ‘मसकली’ फिल्म का हिस्सा बन गया।
इसके बाद यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि साल 2009 के सबसे चर्चित बॉलीवुड गीतों में इसकी गिनती होने लगी। ए. आर. रहमान के संगीत, प्रसून जोशी के अनोखे शब्दों और मोहित चौहान की आवाज ने इसे यादगार बना दिया।
निष्कर्ष
इस तरह 17 साल पुराने ‘मसकली’ गाने की कहानी जितनी दिलचस्प है, उसका नाम भी उतना ही अनोखा है। ‘मसकली’ का कोई तय शब्दकोशीय अर्थ नहीं है; यह प्रसून जोशी द्वारा गढ़ा गया शब्द है। और सबसे बड़ा खुलासा यह है कि जिस गाने को आज लोग दिल्ली-6 की पहचान मानते हैं, वह मूल रूप से शाहरुख खान की ओम शांति ओम के लिए तैयार किया गया था।
