नई दिल्ली, दिल्ली
सोने की कीमतों को लेकर 2026 के लिए बाजार में एक बार फिर बड़ी बहस शुरू हो गई है। हाल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोने की चमक फीकी पड़ने वाली है या यह गिरावट सिर्फ एक अस्थायी दौर है। इसी बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स के आउटलुक ने बुलियन बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है।
फर्म के अनुमान के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तरों की तुलना में करीब 8 प्रतिशत की संभावित तेजी का संकेत देता है।
भारतीय निवेशकों के लिए यह अनुमान खास महत्व रखता है। डॉलर प्रति औंस की अंतरराष्ट्रीय कीमत अगर इस स्तर तक पहुंचती है तो भारत में सोने की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, 4,900 डॉलर प्रति औंस को सीधे रुपये प्रति 10 ग्राम में बदलकर घरेलू बाजार की सटीक कीमत नहीं निकाली जा सकती। भारत में डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और स्थानीय प्रीमियम भी कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हाल के दिनों में बाजार में सोने पर दबाव देखने को मिला है। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की अपेक्षाओं में बदलाव के बाद सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आया। आमतौर पर जब ब्याज दरें ऊंची रहने या बढ़ने की संभावना मजबूत होती है, तब सोने की मांग प्रभावित हो सकती है। इसकी वजह यह है कि सोना नियमित ब्याज या आय नहीं देता।
इसके बावजूद सोने के लिए कई मजबूत समर्थन कारक मौजूद हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता निवेशकों को सुरक्षित संपत्ति की ओर आकर्षित कर सकती है। डॉलर में कमजोरी आने पर भी सोने को समर्थन मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में सोने की चाल बेहद अस्थिर रह सकती है। इसलिए निवेशकों को किसी एक अनुमान के आधार पर जल्दबाजी में बड़ा फैसला नहीं लेना चाहिए। बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, महंगाई, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंकों की खरीद से तय होगी।
कुल मिलाकर, गोल्डमैन सैक्स का अनुमान सोने में तेजी की मजबूत संभावना दिखाता है, लेकिन रास्ते में बड़े उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता।
