नई दिल्ली, दिल्ली।
भारतीय रसोई में केसर का अपना अलग महत्व है। इसकी खास खुशबू और रंग कई व्यंजनों का स्वाद बढ़ा देते हैं। दुनिया के सबसे महंगे मसालों में शामिल केसर की कीमत अधिक होने के कारण आम लोग इसका सीमित इस्तेमाल ही कर पाते हैं। हालांकि, बागवानी के शौकीन लोग सही कंद और अनुकूल वातावरण मिलने पर इसे घर के गमले में भी उगाने की कोशिश कर सकते हैं।
केसर क्रोकस सैटिवस (Crocus sativus) नामक पौधे के फूलों से मिलता है। फूल के बीच मौजूद लाल रंग के महीन रेशों को ही केसर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से ठंडे क्षेत्रों में की जाती है। ऐसे में गर्म इलाकों में घर पर इसे उगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है और परिणाम मौसम पर निर्भर करते हैं।
सबसे पहले चुनें स्वस्थ कंद
केसर उगाने के लिए बीज की जगह कॉर्म या कंद लगाए जाते हैं। अच्छी गुणवत्ता और स्वस्थ कंद का चुनाव करना बेहद जरूरी है। कंद सड़ा हुआ, फफूंद लगा या क्षतिग्रस्त नहीं होना चाहिए। बड़े और स्वस्थ कंद से पौधे और फूल मिलने की संभावना बेहतर हो सकती है।
मिट्टी कैसी तैयार करें?
केसर के लिए भारी और पानी रोककर रखने वाली मिट्टी उपयुक्त नहीं मानी जाती। गमले की मिट्टी हल्की, भुरभुरी और जल निकासी वाली होनी चाहिए। सामान्य मिट्टी में रेत और अच्छी तरह तैयार जैविक खाद मिलाई जा सकती है। गमले के नीचे पानी निकासी के छेद जरूर होने चाहिए।
रोपाई करते समय रखें ये ध्यान
कंद को करीब 8 से 10 सेंटीमीटर गहराई में लगाया जा सकता है। कंद का नुकीला सिरा ऊपर की ओर रखें। एक-दूसरे के बीच पर्याप्त दूरी रखें, ताकि पौधों को बढ़ने के लिए जगह मिल सके।
रोपाई के बाद हल्का पानी दें। इसके बाद बार-बार पानी डालने से बचें। मिट्टी में अत्यधिक नमी रहने से कंद सड़ सकता है।
सही जगह पर रखें गमला
केसर के पौधे को पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है, लेकिन इसकी सफल वृद्धि के लिए तापमान भी अहम है। इसे ऐसी जगह रखें जहां अच्छी रोशनी मिले और मौसम अपेक्षाकृत ठंडा हो। अत्यधिक गर्मी में फूल आने की संभावना प्रभावित हो सकती है।
फूल खिलने के बाद लाल रेशों को सावधानी से निकालकर सुखाया जा सकता है। घरेलू स्तर पर इसका उत्पादन कम हो सकता है, लेकिन अपने हाथों से उगाया गया केसर बागवानी प्रेमियों के लिए खास अनुभव बन सकता है।
