संभल, उत्तर प्रदेश। साइबर ठगी से जुड़े एक संदिग्ध ₹4,000 के ट्रांसफर को लेकर ग्राहक का पूरा बैंक खाता ब्लॉक करना जियो पेमेंट बैंक को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में बैंक की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए ग्राहक का ऑनलाइन खाता अनब्लॉक करने और ₹5,000 क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी खाते में संदिग्ध लेनदेन को लेकर शिकायत है तो बैंक को केवल विवादित धनराशि पर रोक लगाने पर विचार करना चाहिए। पूरे खाते को ब्लॉक कर देना उचित नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब खाते में अन्य वैध धनराशि भी मौजूद हो।
साइबर क्राइम और चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों के अधिवक्ता पारस वार्ष्णेय के अनुसार, संभल के सरायतरीन क्षेत्र के मोहल्ला भालेभाज खां निवासी जीतू ने अपनी सुविधा के लिए जियो पेमेंट बैंक में ऑनलाइन खाता खोला था। यह खाता उसके मोबाइल फोन से जुड़ा हुआ था।
बताया गया कि खाते में करीब ₹50,000 की राशि मौजूद थी। इसी दौरान ₹4,000 के एक ट्रांसफर को संदिग्ध मानते हुए बैंक ने ग्राहक के पूरे खाते पर रोक लगा दी। इसके बाद ग्राहक अपने खाते में मौजूद धनराशि का उपयोग नहीं कर सका।
ग्राहक ने इस कार्रवाई को लेकर उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक की कार्रवाई को अनुचित माना और ग्राहक को राहत देने के आदेश जारी किए।
आयोग ने बैंक को निर्देश दिया कि उपभोक्ता का ऑनलाइन खाता अनब्लॉक किया जाए। साथ ही ग्राहक को हुई परेशानी और मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹5,000 की क्षतिपूर्ति भी दी जाए।
यह फैसला बैंकिंग उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग की टिप्पणी से यह संदेश गया है कि साइबर अपराध या संदिग्ध लेनदेन की जांच के दौरान बैंक को आवश्यक कार्रवाई जरूर करनी चाहिए, लेकिन उपभोक्ता के वैध धन और बैंकिंग सुविधाओं को बिना उचित आधार के पूरी तरह बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
मामले में आयोग के आदेश के बाद बैंक को उपभोक्ता का खाता बहाल करने और निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं।
