मुंद्रा ड्रग्स जब्ती मामले में हरप्रीत तलवार को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद करने की NIA की मांग ठुकराई

नई दिल्ली, दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मुंद्रा पोर्ट नशीले पदार्थ जब्ती मामले में आरोपित हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार की जमानत रद करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें गुजरात हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद करने की मांग की गई थी।

मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि मामला बेहद गंभीर प्रकृति का है और इसमें दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। एजेंसी ने इसी आधार पर आरोपित की जमानत रद करने की मांग की।

एनआईए के अनुसार, यह मामला मुंद्रा पोर्ट से करीब तीन हजार किलोग्राम नशीले पदार्थ की बरामदगी से संबंधित है। एजेंसी ने कहा कि नशीले पदार्थों की खेप ईरान और अफगानिस्तान से खरीदकर भारत लाई गई थी। एनआईए ने यह भी दलील दी कि एजेंसी को यह जानकारी नहीं है कि इससे पहले इस तरह की कितनी खेप भारत लाई जा चुकी हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। पीठ में जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने आरोपित की जमानत रद करने के मामले पर दोबारा विचार करने से इनकार कर दिया।

शीर्ष अदालत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि हरप्रीत तलवार गवाहों को प्रभावित करने या न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश करता है, तो उसकी जमानत रद करने के आदेश पर विचार किया जा सकता है।

पीठ ने कहा कि मामले में कई सह-अभियुक्तों को अभी जमानत नहीं मिली है और कई गवाहों का परीक्षण भी बाकी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हरप्रीत तलवार को मिली राहत के आधार पर अन्य आरोपितों को स्वतः समान लाभ नहीं मिलेगा।

गौरतलब है कि गुजरात हाईकोर्ट ने हरप्रीत तलवार को जमानत दी थी। मामले में दो अन्य आरोपितों को भी जमानत मिली थी। इनमें ईश्वर सिंह बाद में एनआईए के पक्ष में सरकारी गवाह बन गया, जबकि दुर्गा पूर्णा गोविंदराजू वैशाली मामले की इकलौती महिला अभियुक्त बताई गई है।

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