लाहुल स्पीति में बादल फटने से भारी तबाही, मुंची नाले का पुल बहा; खेत-फसलें बर्बाद, पशुधन निकालना बना चुनौती

केलंग, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के लाहुल स्पीति जिले में बादल फटने के बाद मुंची नाले में अचानक तेज बहाव आ गया। पानी की तेज धार ने इलाके में भारी नुकसान पहुंचाया। मुंची नाले का पुल पूरी तरह बह गया, जिसके बाद नाले के दूसरी ओर जाने वाला संपर्क मार्ग बंद हो गया है। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

बादल फटने का असर मुंची नाला और चपॉर नाला क्षेत्र में सबसे अधिक देखने को मिला। तेज बहाव की चपेट में आने से सड़क के अलावा सिंचाई कूहल, पानी की पाइपलाइन और पेयजल टंकी को भी नुकसान पहुंचा है। बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण ग्रामीणों के सामने आवागमन के साथ पेयजल और सिंचाई की समस्या भी खड़ी हो गई है।

मुंची नाले का पुल बहने से संपर्क टूटा

मुंची नाले पर बना पुल तेज बहाव के कारण पूरी तरह बह गया। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद नाले के पार जाने का रास्ता बंद हो गया है। स्थानीय लोगों के लिए यह संपर्क मार्ग काफी महत्वपूर्ण था, इसलिए इसके टूटने से रोजमर्रा की गतिविधियों पर सीधा असर पड़ा है।

पुल और सड़क के बह जाने से प्रभावित क्षेत्र में पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में क्षतिग्रस्त मार्ग को जल्द बहाल करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।

खेतों में घुसा नाले का पानी, फसलें तबाह

तेज बहाव के कारण नाले का पानी खेतों की ओर मुड़ गया। इससे बड़ी मात्रा में कृषि भूमि प्रभावित हुई और खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं।

किसानों के लिए परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि उनका बड़ा कृषि क्षेत्र नाले के दूसरी ओर स्थित है। पुल और संपर्क मार्ग बह जाने के कारण किसान अपने खेतों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं। बची हुई फसल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी अब चुनौती बन गया है।

नाले के पार फंसा पशुधन

पुल और रास्ता बह जाने के कारण ग्रामीणों की गायें और अन्य पशुधन नाले के दूसरी ओर फंस गए हैं। तेज बहाव के बीच पशुओं को सुरक्षित निकालना आसान नहीं है।

ग्रामीणों के सामने पशुधन को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के साथ-साथ खेतों और फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने की भी चुनौती है।

सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को भी नुकसान

बादल फटने से सिंचाई कूहल, पानी की पाइपलाइन और पेयजल टंकी क्षतिग्रस्त हुई है। इससे ग्रामीणों और किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने से कृषि कार्य पर असर पड़ सकता है, जबकि पेयजल ढांचे को नुकसान पहुंचने से स्थानीय लोगों के सामने पानी की समस्या पैदा हो सकती है।

लाहुल स्पीति जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में सड़क और पुल का संपर्क टूटना लोगों की मुश्किलें और बढ़ा देता है। ऐसे में संपर्क मार्ग की बहाली, पेयजल-सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करना और फंसे हुए पशुधन को सुरक्षित निकालना प्राथमिकता बन गई है।

बादल फटने की इस घटना ने स्थानीय लोगों के सामने प्राकृतिक आपदा से निपटने की गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। क्षेत्र में हुए नुकसान के बाद प्रभावित परिवारों को राहत और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी अहम होगा।

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