संसद फिर ठप, विपक्ष ने जारी रखा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली, दिल्ली

गुरुवार सुबह राज्यसभा ने अपने सत्र की शुरुआत मात्र दस मिनट तक की और फिर दो बार स्थगित कर दिया गया। इस दौरान सदन में विपक्ष और सरकार के बीच जारी तनातनी देखने को मिली। विपक्ष द्वारा लगातार शोरगुल और नारेबाजी की वजह से सदन के कामकाज में व्यवधान उत्पन्न हुआ। इस स्थिति को लेकर नेता सदन जे.पी. नड्डा ने विपक्ष के व्यवहार को ‘अत्यंत गैरजिम्मेदाराना’ करार दिया।

राज्यसभा के कार्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने अपने मुद्दे को उठाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और लगातार नारेबाजी कर सदन की कार्यवाही बाधित की। इसका परिणामस्वरूप सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा। विपक्ष ने विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरशोर से आवाज उठाई। विपक्षी दलों का कहना था कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे सदन की कार्यवाही में सहयोग नहीं करेंगे।

प्रधानमंत्री के प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत जे.पी. नड्डा ने विपक्ष के इस व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि संसद में चर्चा और वाद-विवाद जरूरी है, लेकिन इस प्रकार का व्यवधान बहुत ही अनुचित और गैरजिम्मेदाराना है। उन्होंने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने की अपील की।

वहीं, दूसरी ओर, विपक्ष के नेताओं ने सरकार की नीतियों और मंत्रियों के व्यवहार पर तीखा हमला बोला और धार्मिक एवं सामाजिक मुद्दों को लेकर अपनी असहमति जताई। इसके चलते सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई और सदन की कार्यवाही कई बार बाधित होती रही।

विशेषज्ञों का मत है कि ऐसी स्थिति में संवाद और सहमति की जरूरत है ताकि पारदर्शिता के साथ संसद का कामकाज सुचारू रूप से चल सके और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बल मिले। इस घटनाक्रम में यह स्पष्ट है कि संसद में चल रही राजनीतिक खींचतान अभी भी जारी है और इसके समाधान के लिए सभी दलों को समझौते की आवश्यकता है।

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