पंजाब: बेअदबी मामले में आज एसआईटी के सामने पेश होंगे सुखबीर सिंह बादल

चंडीगढ़, पंजाब: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। बेअदबी मामले में सोमवार को विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सामने उनके पेश होने का समय निर्धारित है। इस मामले की जांच को लेकर राजनीतिक हल्कों में चर्चा तेज हो गई है।

सुबह 11 बजे सुखबीर सिंह बादल को चंडीगढ़ स्थित पंजाब पुलिस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट बुलाया गया है, जहां एसआईटी उनसे पूछताछ करेगी। यह नोटिस एसआईटी ने 16 जुलाई को जारी किया था, जिसमें उन्हें चंडीगढ़ में जांच प्रक्रिया में शामिल होने का निर्देश दिया गया था।

यह पूछताछ पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय सांपला के बयान के बाद हुई है। सांपला ने उस मेमोरेंडम की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए हैं, जिसे सुखबीर बादल ने राज्यपाल के समक्ष बेअदबी की घटनाओं के संबंध में प्रस्तुत किया था। इस बयान के बाद एसआईटी ने सुखबीर से विस्तार से पूछताछ करने का फैसला किया।

पूछताछ से पहले सुखबीर सिंह बादल ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि वह एसआईटी के साथ पूर्ण सहकार्य करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है और इसका उपयोग न्याय के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले दस वर्षों से इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाया जा रहा है।

सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “पिछले दस सालों से बेअदबी के मुद्दे पर राजनीति चल रही है। अब जब चुनाव नजदीक हैं, तो सरकार एक बार फिर ऐसा ड्रामा कर रही है। मैंने पहले भी जांच में भाग लिया है और जब भी बुलाया जाएगा, मैं पहुंचूंगा। मेरा वादा है कि 2027 में जब शिरोमणि अकाली दल सत्ता में आएगा, तब दोषियों को कठोर सजा दी जाएगी जो मिसाल बनेगी।”

यह मामला 11 साल पुराने बहिबलकलां गोलीकांड से जुड़ा है, जिसमें फरीदकोट जिले में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दो प्रदर्शनकारी मारे गए थे और कई घायल हुए थे। एसआईटी इस कांड की जांच कर रही है और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के पहले और बाद की घटनाओं का व्यौरा भी जुटा रही है।

जांच के दौरान कई पूर्व अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के बयान दर्ज किए जा चुके हैं ताकि इस मामले में न्यायिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। दावा है कि पूर्व अकाली विधायक मनतार बरार ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और पुलिस महानिदेशक से बातचीत की थी। साथ ही, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के ओएसडी ने भी पुष्टि की कि प्रदर्शनकारियों को हटाने का आदेश रात को दिया गया था।

यह मामला राजनीतिक और कानून व्यवस्था दोनों ही दृष्टिकोण से पंजाब की राजनीति में अहम स्थान रखता है, और इसके परिणाम आने वाले दिनों में बड़े बदलाव ला सकते हैं। एसआईटी की जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ चल रही है ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके और न्याय की प्रक्रिया पूरी हो सके। जनता इस मामले में न्याय मिलने की उम्मीद लगाए हुए है।

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